
पुत्रदा एकादशी व्रत 2 जनवरी 2023
भविष्योत्तर पुराण में भगवान् श्रीकृष्ण तथा महाराज युधिष्ठिर के संवाद में पुत्रदा एकादशी के महात्म्य का वर्णन मिलता है। महाराज युधिष्ठिर ने पुछा, "हे श्रीकृष्ण ! कृपा करके मुझे पौष मास की शुक्ल पक्षकी एकादशी का वर्णन करे । उस व्रत की विधि क्या है ? तथा कौनसे देवताकी पूजा की जाती है।
भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा, "जगत कल्याण के लिए इस एकादशी का मैं वर्णन करूँगा। अन्य एकादशी की तरह इस एकादशी को व्रत करे। इसे 'पुत्रदा' कहते है। सब पापों का हरण करनेवाली यह सर्वोत्तम तिथि है। कामना तथा सिद्धी को पूर्ण वा भगवान् इस तिथिके अधिदेवता है। पूरे त्रिलोकमें यह सबसे उत्तम तिथि है। एक दिन घोडेपर सवार होकर महाराज सुकेतुमान गहरे वन में चले गये । पुरोहित और दूसरे लोगों को इसकी कल्पना नही थी । पशु-पक्षियोंसे भरे हुए इस गहरे वन में महाराज भ्रमण कर रहे थे। दोपहर होते ही, महाराज को भूख और प्यास लगी । जल की तलाश में महाराज इधर-उधर घूम रहे थे । पूर्वजन्मके पुण्यसे उन्हे एक जलाशय दिखाई दिया । उस जलाशय के पास ही एक मुनिका आश्रम था ! अनेक शुभ शकुन होने लगे, उनकी बाँयी आँख और बायाँ हात फड़कने लगा । शुभ घटना की आशा में राजा आश्रम में गये । उन्हें देखकर राजा को बहुत प्रसन्नता हुई घोड़े से उतरकर राजाने सभी मुनियोंको प्रणाम किया, तब उन मुनियोंने कहा, "हे राजन ! हम आपपर प्रसन्न है। राजा ने कहा, मुनिगण ! आप कौन है ? आपके नाम क्या है? आप यहाँपर किस उद्देश्यसे एकत्रित हुए है ? कृपया हमे सत्य बताईये।
मुनि ने कहा, "राजन ! हम विश्वदेव है । आजसे आनेवाली पाँचवी तिथिसे माघ मास प्रारंभ होगा । आज 'पुत्रदा एकादशी है। जो कोई भी यह एकादशी करता है। उसे पुत्र प्राप्ति अवश्य होती है ।
मुनिने कहा, "राजन! आज 'पुत्रदा एकादशी है। आज आप इसका पालन करे, भगवान केशव के प्रसादरूप आपको पुत्रप्राप्ति होगी।
भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा, “हे युधिष्ठिर ! इस प्रकार मुनियोंके कहनेपर राजाने एकादशी व्रत किया । द्वादशी को व्रत संपूर्ण करके (पारण करके) मुनियोंका आशिर्वाद लेकर राजा वापस आया । उसके पश्चात् राणी गर्भवती हुई और एकादशी के पुण्य से राजाको तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई । जिसने अपने उत्तम गुणोंसे अपने पिताको संतोष दिया, वह उत्तम प्रजापालक था । इसलिए, हे राजन! 'पुत्रदा' व्रत अवश्य करना चाहिए। जो कोई भी इस व्रतका पालन करता है उसे पुत्रकी प्राप्ति होकर वह मनुष्य स्वर्गप्राप्त करता है।जो इस व्रत की महिमा पडेगा, सुनेगा या कहेगा उसे अश्वमेध यज्ञ के फल की प्राप्ति होगी।
आचार्य दिनेश पाण्डेय (मुम्बई & उत्तराखण्ड)
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